Friday, 6 April 2018

जशपुर में उगता सूरज

उगते सूरज की सुंदर दृश्य जो आपको जशपुर आने को मजबूर कर देगा

सुबह सुबह रोज हम घूमने के लिए निकलते हैं सुबह की ताजी  ताजी सुगंधित ठंडी हवा मन को तृप्त कर देती है । खुश्बू से भरी ताजगी से दिन भी ताजा ताजा रहता है इसलिये यह हम लोग शहर का एक चक्कर लगाते हैं । आप सोच रहे होंगे की हम कौन हम में तो बस अभी मैं आकाश सोनी फोटोग्राफर अंकित गुप्ता और मैं आपका सरीन  राज.....

आज जब मॉर्निंग वॉक करके रणजीता स्टेडियम पहुँचे ठीक उसी समय सूर्य की हल्की हल्की रौशनी हुई और फिर क्या था फोटोग्राफर का कलाकार मन जाग गया । आकाश सोनी ने अपने मोबाइल से सूर्योदय का विभिन्न फोटोशूट   करने लगा जो उसने फ़ोटो खींची अद्भुत सूंदर और अकल्पनीय जो दृश्य उसने अपने मोबाइल में कैद किया उसे उसने उसे अपने फेसबुक पेज में भी है । बस मुझे आपको सूर्योदय का एक दृश्य दिखाना है बाकी जो भी नजर से गुजरेगा वह आप तक ब्लॉग के माध्यम से जरूर पहुंचेगा

Tuesday, 3 April 2018

जशपुर में फूलों के पेड़ों का सौंदर्य


सरीन राज ......

जशपुर

खूबसूरत फूलों के पेड़ का सौंदर्य

" जिधर से गुज़रिये जशपुर की सड़कों में फूल ही फूल आपके कदमों में बिछे दिखाई देंगे........ आप भी आइये देखिये गुज़रिये जैसी   अनुभूति आपको होगी निश्चित ही वह एक  अकल्पनीय एवं सुखद ही होगी।


मौसम कोई भी हो जशपुर हमेशा ही आपका स्वागत मुस्कुराकर खिलखिलाकर ही करेगा .....


ये जशपुर की भूमि हैं संस्कारो की जननी है संभावनाओं की उपजाऊ भूमि है प्राकृतिक रूप से परिपूर्ण है इस भूमि में जैसा आवरण ईश्वर ने पहनाया है वह अद्भुत और आकर्षक है। यह हर किसी को चाहे अनचाहे ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है  । 
कुछ फोटो आपके साथ मैं शेयर कर रहा हूँ जो जशपुर को फ़ोटो के माध्यम से नई पहचान देने की कोशिश करते हैं वो हैं राजू गुप्ता जी और आकाश सोनी जी ,दोनों ने जशपुर के सुंदर फोटोग्राफ ले कर इस धरती की सुंदरता को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है ।
जशपुर की सड़कों में बिछे फूलों से मुझे माखनलाल चतुर्वेदी की एक कविता याद आ रही है

चाह नहीं मैं सुरबाला के
                  गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में
                  बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव
                  पर हे हरि, डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर
                  चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ।
मुझे तोड़ लेना वनमाली!
                  उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
                  जिस पर जावें वीर अनेक

- माखनलाल चतुर्वेदी  जी ने भले ही इसे दूसरे अर्थों में लिया है परंतु जशपुर के लोगों पर प्रकृति इतनी महान है की खुद ही उनके राहों पर बिछ जा रही है क्योंकि प्रकृति से कुछ छिपी नहीं है वो ये जानती भी है कि ये वीरों की शहीदों की भूमि है इसलिये खुद ही इन फूलों को राहों पर बिछा देती है यह समझने में लोगों को भले ही वक्त लगे पर प्रकृति को नहीं । ना फूलों को राहों में फेंकने की आवश्यकता है बस प्रकृति के इशारे को समझने की आवश्यकता है शायद इस का लोग खुद अनुभव करेंगे।

गुलमोहर

गुलमोहर फूल वाले वृक्षों में सबसे अधिक भड़कीला वृक्ष है। इसका दूसरा नाम 'वन की ज्वाला' है। इसके फूलों से लोग पीला रंग बनाते हैं, जिसे वे होली में आम तौर से इस्तेमाल करते हैं।"  मुझे वनस्पति-विज्ञान का मुझे कुछ अनुभव नहीँ है बस घुमते घुमते  इस नीरस से जीवन में इन्हीं वनस्पतियों ने ऊर्जा भर दी। इस ऊर्जा ने चिंगारी का काम किया और मेरी कल्पना और लेखनी में लौ लगायी । सुंदर फूल वाले वृक्षों के प्रति मेरे प्रेम की ज्योति जगायी। फिलहाल आपको बता दूं कि सुर्ख गुलमोहर ने अपना रूप अभी नहीं लिया है जबकि अप्रेल का यह पहला सप्ताह है । 


पलाश का सुर्ख दमकता फूल

 पलाश का पेड़, फूल वाले वृक्षों में सबसे अधिक भड़कीला वृक्ष है। इसका दूसरा नाम 'वन की ज्वाला' है। इसके फूलों से लोग पीला रंग बनाते हैं, जिसे वे होली में आम तौर से इस्तेमाल करते हैं।" जब मैं बाहर दौरे पर जाता था, तब मुझे पलाश के पेड़ों का सुर्ख रंग हमेशा से खींचता है मुझे पलाश के जंगलों में घूमने बड़ा चाव है पर जंगल तो यहाँ नहीँ किसी किसी जगह में कुछ संख्या में पेड़ हैं जिसे देखकर लगता है कि कभी यहाँ पलाश के जंगल निश्चित ही रहे होंगे अभी सैकड़ो की संख्या में जशपर से 60 km दूर तपकरा मार्ग में हल्दीमुण्डा मार्ग में हैं जो आपको मार्च के दूसरे हप्ते में अपना जलवा दिखा सकते हैं अभी  इसकी फोटोग्राफी के लिए मार्च के आखिरी सप्ताह में हम वहां जाकर अपने आंखों को सन्तुष्टि पहुंचाई है । जब हम स्पॉट पर पहुंचे सुर्ख लाल रंग के पलाश की खुबसूरती देखते ही बन रही थीव। मार्च के महीने में पलाश के फूलों से लदे वृक्ष दूर से अंगारों की लपटों के समान दिखायी देते हैं।
सुनहले खेतों के पीछे इन वृक्षों का दृश्य अति मनोरम प्रतीत होता है। पत्तियों रहित शाखाओं में हुए पलाश के फूल जलती मशालें मालूम होते हैं। उस दृश्य को मैं कभी नहीं भूल सकता हूँ। जब भी मौका मिला घूमने का , मैं घंटो समय इन फूलों की शोभा देखने में बिताता हूँ। 

नीला गुलमोहर

जशपुर में नीले गुलमोहर के गहरे नीले और बड़े सावनी रंग के बैंगनी और जामुनी रंगों के पेड़ों की झलक अघोरेश्वर आश्रम जशपुर हाऊसिंग बोर्ड ,आराम निवास पैलेस सिटी कोतवाली के पास  देखी जा सकती है इसके अलावा भी कई स्थान पर आप नीले गुलमोहर की खूबसूरती का मजा ले सकते हैं। मैं हर साल इन फूलों को देखता हूँ पर इसबार मैं इनके सुंदरता पर मुग्ध होकर इन सुंदर सुंदर फूलों के प्रेम में फँस गयाहूँ । चाहे वह नीला या लाल नारंगी  गुलमोहर हो या मनमोहक पीले फूल वाले अमलतास हो ।  गजब का आकर्षण इन पेड़ों के फूलों में है


फूल वाले वृक्षों की शोभा के प्रति अपने देश के लोगों की उदासीनता है। मालूम नहीं उन्होंने अपने पलाश, कचनार और सेमल के अनुपम सौंदर्य को कैसे भुला दिया। फल और इमारती लकड़ी के लिए बहुत-से लोग वृक्ष लगाते हैं, लेकिन शोभाकर फूल वाले वृक्ष लगाने की चिन्ता करने वालों की संख्या बहुत कम है। फलों के वृक्षों की देखभाल तो अपने-आप हो जाती है, इसलिए मैंने यह अनुभव किया कि जहाँ सुंदर फूलों के वृक्ष लगाने की जरूरत है, वहाँ उन्हीं को लगाने पर अधिक से अधिक बल देना चाहिए। इस समय राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों और नहरों के किनारों पर लगाये जाने वाले वृक्षों में शोभाकर वृक्षों के लिए कोई स्थान है। लेकिन इसे घरों, पार्कों और सरकारी इमारतों के अहातों में और नगरों की सड़कों के किनारे उन्हें उचित स्थान तो मिलना चाहिए।

शोभाकर वृक्षों की अवश्यकता

आजकल हमारे देशवासियों में सौंदर्य-भावना की बड़ी कमी है। इसलिए जरूरत है शोभाकर वृक्षों को लगाने और प्रचार प्रसार करने की है यदि प्रचार में कुछ अतिशयोक्ति से काम लेना पड़े तो वह भी क्षंतव्य है। अशोक के समय में और गुप्त काल में हमारे पूर्वजों की सौंदर्य-भावना बहुत ही उत्कृष्ट थी। लेकिन आश्चर्य की बात है कि उनकी संतानों में उस भावना की बड़ी कमी है। 
मैंने विचारा कि यदि घरों और नगरों के सार्वजनिक स्थानों में शोभाकर वृक्ष लगाये जाएँ तो वे इस दुःखद अभाव को मिटाने में समर्थ होंगे ,उसका परिणाम भी अच्छा होगा। अपने को सुसंस्कृत समझने वाले, विशेषकर पढ़े-लिखे लोगों की रूचि बहुत कुछ सुधर जाएगी। मैंने निश्चय किया कि जो लोग हठपूर्वक आँखें मूँद कर देखना भी नहीं चाहते, उन्हें इन वृक्षों के सौंदर्य को कई गुना बढ़ा कर दिखाना चाहिए। रंगीन फूलों के वृक्षों को सड़कों गलियों स्कूलों घरों  और नगरों की सड़कों के किनारे कतारों में लगाकर, लोगों को इनकी सुंदरता का प्रदर्शन कराना चाहिए। अपने-अपने बगीचों में ऐसे वृक्ष लगाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए। हमें तो उनके घरों तक इस सौंदर्य को पहुँचाना है। मैंने जिले की अदालतों, तहसीलों, स्कूलों और सड़कों पर बने हुए सुसम्पन्न व्यक्तियों के बँगलों के अहातों में इन शोभाकर वृक्षों को देखा है । वृक्ष प्रकृति-सौंदर्य के प्रेम का मेरा संदेश कम से कम आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाएँगे। लोगों को ऐसे वृक्ष लगाने चाहिए जो हर महीने रंग-रंग के फूल देते रहें।  

आइये ये जशपुर आपका फूलों से स्वागत करेगा आप इनकी खुशबू से मदहोश हो जायेंगे
आइये जशपुर......









Saturday, 24 March 2018

जशपर में फूलों की मनमोहक खूबसूरती


फूल खिले हैं गुलशन गुलशन.....

इस मौसम में भी जशपुर के फ़िज़ा में फूलों की बाहर है । इन फूलों का सौंदर्य और उनकी मादक खुशबू बरबस ही लोगों को अपनी ओर खींच रही है ये फूलों की वादियाँ,ये है ख़ूबसूरती का जहाँ;मैं तो डूब जाऊँ,इन हसीन वादियों में, ये फूलों की वादियाँ....

फूलों का शहर जशपुर

जशपुर जशपुर के बारे में आपने जरूर सुना होगा। नहीं सुना !तो मैं आपको बता दूं कि जशपर NH 43 में रायगढ़ रांची मार्ग में स्थित है ।यह हमारा जिला मुख्यालय है जो कि तेजी से विकास कर रहा है ।

प्राकृतिक रूप से समृद्ध जशपुर की पहचान ही यहाँ के पेड़ों पहाड़ो फूलों नदी नालों से है। जिस तरफ नजर दौड़ाइये साल सरई के पेड़ ही नजर आएंगे। शुद्ध वातावरण शांत माहौल ये यहां के लोगों को अलग तरह की ऊर्जा प्रदान करते हैं ।
चूँकि आज मै यहाँ के फूलों के बारे में बता रहा हूँ तो पुनः विषय पर आता हूँ । यहाँ रोज का तापमान दोपहर में 28 डिग्री और रात 13 डिग्री के आस पास होता है जो की फूलों के लिए काफी अच्छा होता है । मार्च का आखिरी महीना है और गर्मी यहां शुरू नहीं हुई है यही मौसम फूलों के लिए बहुत अच्छा है सभी तरह के फूल बागों में खिले हुए हैं जो सहज ही सबका ध्यान आकर्षित करते हैं गुलाब के फूल तो डालियों में शान के साथ इतरा रहे हैं । मैं आपको बताना चाहता हूँ कि जशपुर में लोग फूलों पौधे के काफी शौकीन हैं भले ही छोटा सा घर हो लेकिन दो चार गमले तो दिख ही जायेंगे जिनका बड़ा जगह है वो तो खूब गार्डनिंग करते है । जिस तरफ से गुजरिए फूलों की मादक खुशबू आपको प्रसन्न कर देगी । कल मैं और आकाश सोनी जो जशपुर के उभरते हुए फोटोग्राफर है दोनों ने कई जगह की फूलों की फ़ोटो खींची जिसमे गर्ग हॉउस गम्हरिया, संजय निकुंज और बाला साहब उद्यान में खिले फ़ोटो खिंचे जिसके बाद मन प्रसन्न हो गया । आकाश सोनी जी ने फ़ोटो को अपने फेसबुक पेज में भी शेयर किया है जिसे मैं भी शेयर किया हु आपको पसंद आएगा
आज के लिए इतना ही अगली पोस्ट फिर जशपुर से होगी  तब तक के लिए आप इंतजार कीजिये । मुझे आशा है कि ये फूलों वाली पोस्ट आपको जशपुर आने के लिए प्रेरित करेगी ।
धन्यवाद

आपका
सरीन राज
जशपर 7987721739

Thursday, 22 March 2018

जशपर में सूर्यास्त का सुंदर दृश्य


            जशपुर के लोरोघाट से                        सूर्यास्त का सुंदर दृश्य

                      आज जब मैं रनपुर से जशपुर वापस लौट रहा था तो जैसे ही हम लोरो घाट पर पहुंचे तो सूरज पहाड़ियों पर ढलने के लिए बढ़ रहा था । परमहंस अग्रज जी की फोर्स में आगे की शीट में फोटोग्राफर बड़े भईया राजू गुप्ता जी बैठे थे उन्होंने अपने मोबाइल से सनसेट की तस्वीर अपने मोबाइल में क़ैद कर ली फिर उन्होंने तस्वीर मुझे दिखाई जो बहुत ही सुंदर लगी और फिर मैंने उनसे ये तस्वीर मांग ली चूँकि मुझे प्राकृतिक दृश्यों का शौक है इस लिए जब भी अवसर मिलता है मैं प्रकृति की गोद मेजाकर मन को शांति पहुंचाने का काम करता है अगले पोस्ट मैं आपको राजू गुप्ता जी और हमारे आसपास के प्राकृतिक दृश्यों स्थानों के बारे में जरूर बताऊंगा फिलहाल यही कहना चाहता हूँ की हमारे जशपुर की प्रकृति भी कश्मीर और शिमला से कम नहीं है कभी अवसर मिले तो जशपुर जरूर आइये 

                     चूंकि यह आज मेरा पहला ब्लॉग है इसलिए मैं अधिक नहीं लिखूंगा पता चला की आप मुझसे नाराज हो गए तो ,मैं किसी भी स्थिति में आपको नाराज नहीं करना चाहता इसलिये अब विराम लेता हूँ । 

       ब्लॉग में सूर्यास्त का सूंदर फ़ोटो आपसे शेयर कर रहा हूँ आशा करता हु जो आपको जरूर पसन्द आएगा । ब्लॉग करना सीख रहा हु । फिर मिलेंगे। खुदा हाफिज 

आपका 

सरीन राज

जशपुर छत्तीसगढ़
7987721739
Sareenraj09@gmail. com
और फेसबुक, twiter में भी इसी

Friday, 15 April 2011